“My life did not pull me toward the day of union, Nor did the night end the separation.”
वस्ल के दिन को मेरे प्राणों ने नहीं खींचा, न ही रात ने विरह के अंत को किया।
Mir Taqi Mir यहाँ एक गहरी उदासी का भाव प्रस्तुत करते हैं। यह शेर बताता है कि जीवन की धारा न तो प्रेमी को मिलन के सुखद दिन की ओर खींची, और न ही रात के गुजरने से बिछोह का दुःख समाप्त हुआ। यह एक ऐसा स्थायी बिछोह है जो समय या भाग्य के बदलने से भी नहीं मिट सकता। शायर इस तरह अपनी नियति की पकड़ को दर्शाते हैं कि वियोग की पीड़ा ही उसका एकमात्र स्थायी साथी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
