कुछ मुरव्वत न थी उन आँखों में
देख कर क्या ये आश्नाई की
“There was no sorrow in those eyes, Seeing them, what assurance was there?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उन आँखों में कोई उदासी नहीं थी, देखकर तो किस तरह का भरोसा किया जा सकता है।
विस्तार
यह शेर बताता है कि इश्क़ सिर्फ़ बाहरी खूबसूरती पर नहीं टिका होता। शायर पूछ रहे हैं कि अगर उन आँखों में कोई ख़ास नज़ाकत या जादू ही नहीं था, तो फिर इतना गहरा जुड़ाव, इतनी अपनापन (आश्नाई) कैसे हो गया? यह एक सवाल है, एक तसल्ली नहीं। यह दिल की उस उलझन को बयान करता है, जब रूह को किसी चीज़ से अपनापन महसूस होता है, भले ही वह नज़र में न दिखे।
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