ख़ंदा-ए-यार से तरफ़ हो कर
बर्क़ ने अपनी जग-हँसाई की
“From the laughter of the beloved, having turned away, The lightning has mocked its own existence.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रिय के हँसी की तरफ़ मुड़कर, बिजली ने अपने अस्तित्व का मज़ाक उड़ाया।
विस्तार
यह शेर माशूक़ की मुस्कान की अजब ताक़त को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि जब आप महबूब की तरफ़ मुड़कर देखते हैं, तो न सिर्फ़ दिल धड़कना बंद कर देता है.... बल्कि प्रकृति के सबसे ज़बरदस्त नज़ारे भी हैरान रह जाते हैं। बिजली (बर्क़) को भी अपनी दुनिया की तमाशाबाज़ी छोड़नी पड़ती है और बस हँसना पड़ता है। यह मुस्कान, यह हँसी, सब कुछ थमने का कारण है!
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