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निस्बत उस आस्ताँ से कुछ हुई बरसों तक हम ने जब्हा-साई की

There was no relationship with that threshold, For years we were simply the devotees.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उस आँगन से कोई नाता नहीं बना, वर्षों तक हमने केवल साईं की भक्ति की।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब कोशिशें नाकाम रह जाती हैं। शायर कहते हैं कि वर्षों तक हमने उस दरवाज़े के पास अपनी उपस्थिति बनाए रखी, लेकिन वह वास्तविक रिश्ता—वह 'निस्बत'—कभी बन ही नहीं पाया। यह एहसास दिलाता है कि केवल पास होना या दिखावा करना काफी नहीं होता। कभी-कभी, दिल का जुड़ाव तो सिर्फ़ एक ख्वाब बनकर रह जाता है।

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