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'मीर' की बंदगी में जाँ-बाज़ी सैर सी हो गई ख़ुदाई की

In the devotion of Mir, life-risk-taking Became a mere stroll through the divine.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मीर की बंदगी में जान-बाज़ी, ख़ुदाई की सैर सी हो गई।

विस्तार

यह शेर आत्मिक सफ़र की बात करता है। शायर कहते हैं कि अपनी 'बंदगी' या अपनी पहचान से जुड़े रहना... यह एक खतरनाक जुआ है। लेकिन जब हम पूरी तरह से ख़ुदा की राह पर चल पड़ते हैं, तो ये भटकना, ये सफ़र... ख़ुद ही एक सुकून भरी सैर बन जाता है। यह स्वयं से ऊपर उठकर, ईश्वर से जुड़ने की बात है।

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