इल्तिफ़ात-ए-ज़माना पर मत जा — मीर तक़ी मीर
इल्तिफ़ात-ए-ज़माना पर मत जा
'मीर' देता है रोज़गार-फ़रेब
“Do not rely on the favor of the world, 'Mir' warns that it is merely a deceitful livelihood.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दुनिया की मेहरबानी पर भरोसा मत करना, 'मीर' कहता है कि यह केवल एक झूठा रोज़गार है।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी की एक बहुत गहरी हकीकत समझाता है। शायर हमें आगाह कर रहे हैं कि दुनिया की कोई भी मेहरबानी या इल्तिफ़ात पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि रोज़गार का जो हमें सहारा लगता है, वो भी एक फ़रेब है। यह एक चेतावनी है कि दुनिया की कोई भी चीज़ स्थायी नहीं होती, इसलिए हमें अपने आप पर और अपनी रूह पर भरोसा रखना चाहिए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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