वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला — मीर तक़ी मीर
“That one left home, intoxicated with wine, And shame-faced, the sun itself emerged in liquor's stain.”
अर्थ
वह तो घर से अपने पीकर शराब निकला, और शर्म से अर्क में डूब आफ़ताब निकला।
विस्तार
देखिए, मिर्ज़ा तक़ी मीर ने यहाँ दो तरह के विदाई के नज़ारे पेश किए हैं। एक विदाई है जो अपने घर से शराब पीकर निकलना, जो बहुत स्वाभाविक और सहज है। और दूसरी विदाई है, जो सूरज (आफ़ताब) की है—जो शर्म के नशे में डूबकर निकला। शायर कह रहे हैं कि सहजता से निकलना एक बात है, लेकिन शर्म और संकोच में निकलना कितना मुश्किल होता है, यह बहुत गहरा एहसास है!
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