“The Shaikh who was naked in the mosque at night, was in the tavern with a jubba, khirqa, kurta, and cap, full of joy.”
वह शैख़ जो रात में मस्जिद में नंगा था, वह मय-ख़ाने में जुब्बा, ख़िर्क़ा, कुर्ता और टोपी पहने हुए मस्ती में था।
यह शेर इंसानी पाखंड और दोहरेपन पर एक गहरा तंज़ है। शायर बता रहे हैं कि जो शख़्स रात को मस्जिद में नग्न होकर, सादगी का दिखावा करता है, लेकिन जैसे ही वह मयख़ाने में पहुँचता है, तुरंत एक 'जुब्बा' और 'टोपी' पहन लेता है। इसका मतलब है कि दुनिया की महफ़िल में, दिखावा और तामझाम ही सबसे बड़ी सच्चाई है। यह एक बहुत ही कड़वा, लेकिन गहरा सच है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
