अहद-ए-जवानी रो रो काटा पीरी में लीं आँखें मूँद या'नी रात बहुत थे जागे सुब्ह हुई आराम किया

“I kept my eyes closed in the bed of my youth, weeping, as if I had spent the night awake, and found rest when morning came.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

जवानी के बिस्तर में रोते हुए आँखें मूंद लीं, मानो पूरी रात जागकर बिताई हो और सुबह होने पर आराम किया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर का जीवन और समय के साथ संघर्ष को दर्शाती एक गहरी बात है। 'जवानी का अहद' उस दौर को दिखाता है जब आप अपने सपनों के लिए पूरी रात जागकर, आँसू बहाते रहे। और दूसरी लाइन बताती है कि जब आप पूरी रात संघर्ष करते-करते थक जाते हैं, तो सुबह का आना एक सुकून भरा आराम लेकर आता है। यह समय के आगे झुकने, और शांति स्वीकार करने की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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