गरेबाँ से तब हाथ उठाया था मैं ने — मीर तक़ी मीर
“From the impoverished place, I raised my hand, When my life and the curtain of the wilderness had passed.”
अर्थ
मैंने गरीबी से जब हाथ उठाया, तब मेरा जीवन और रेगिस्तान का पर्दा गुज़र चुका था।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जब मैंने उस वीराने (गरेबाँ) से अपना हाथ उठाया, तो मेरी अपनी पहचान (मिरी) और उस विशाल रेगिस्तान की गोद (दामन-ए-सहरा) एक हो गई। इसका मतलब है कि जब हम हिम्मत करके कोई कदम उठाते हैं, या जब हम अपने आप को किसी बड़ी चीज़ से जोड़ते हैं, तो हमें अपने आप में एक नई पहचान मिल जाती है। यह एक अद्भुत एहसास है!
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