गई होती सर आबलों के पे हुई ख़ैर — मीर तक़ी मीर

गई होती सर आबलों के पे हुई ख़ैर बड़ा क़ज़िया ख़ारों से बरपा हुआ था

“If not for the gentle showers, the matter would have been settled, A great quarrel had been brewing from the thorny thickets.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

यदि आबलों (बारिश) के कारण नहीं होती, तो बात सुलझ गई होती। खारों से एक बड़ा विवाद पनप रहा था।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब यहाँ एक गहरे दुर्भाग्य का एहसास करा रहे हैं। उनका कहना है कि यह दर्द, यह जो काँटों से बुना गया बड़ा क़ज़िया था, यह तो आबलों के सर पर होना चाहिए था। कहीं ऊँचाई पर, कहीं ख़ूबसूरत जगह पर... पर ये तो ज़मीन पर, हमारे सर पर आ गिरा। एक तरह का अफसोस है कि तक़दीर ने हमें यह सब झेलने को दिया।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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