ख़िज़ाँ इल्तिफ़ात उस पे करती बजा थी — मीर तक़ी मीर

ख़िज़ाँ इल्तिफ़ात उस पे करती बजा थी ये ग़ुंचा चमन में अभी वा हुआ था

“Autumn's graces used to play upon her; / This bud in the garden had only just bloomed.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

पतझड़ की कृपा उस पर बरसा करती थी; यह कली अभी बाग में खुली ही थी।

विस्तार

यह शेर उस दर्द को बयां करता है जब मोहब्बत का वक़्त गलत होता है। शायर कहते हैं कि जैसे एक चमन का ये नन्हा सा ग़ुंचा.... जब अभी-अभी खिला है, उस पर प्यार की पतझड़ (ख़िज़ाँ) आकर अपनी धुन बजा देती है। यह सिर्फ़ फूलों की बात नहीं है, बल्कि उस एहसास की बात है जब हम ज़िंदगी में कोई नई शुरुआत करते हैं.... और किसी बेवक्त मोहब्बत ने हमें तोड़ दिया!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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