मर गया जो असीर-ए-क़ैद-ए-हयात — मीर तक़ी मीर

मर गया जो असीर-ए-क़ैद-ए-हयात तंगना-ए-जहान से निकला

“The one who died, captive of life's prison, Has emerged from the world's confinement.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जो व्यक्ति जीवन के बंधन का कैदी था, वह दुनिया के घेरे से निकल गया।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने ज़िंदगी की सबसे बड़ी आज़ादी के बारे में कहा है। शायर कहते हैं कि जो इंसान दुनिया की बेड़ियों में क़ैद है, उसके लिए मौत एक मुक्ति है। यह एक गहरा तफ़कर है, जो हमें बताता है कि दुनिया की तंग गलियों से निकलना ही सबसे बड़ा छुटकारा है। यह सिर्फ़ मरना नहीं, बल्कि एक आज़ाद हो जाना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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