निकली थी तेग़ बे-दरेग़ उस की — मीर तक़ी मीर

निकली थी तेग़ बे-दरेग़ उस की मैं ही इक इम्तिहान से निकला

“She had left, wandering aimlessly, without a path, And I passed through an ordeal, a test, to emerge.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

उसकी तेग़ (यानी उसका गुमान या गर्व) बिना किसी सहारे के निकल गई थी, और मैं ही एक परीक्षा से निकल पाया।

विस्तार

देखिए, यह शेर कितना गहरा है। शायर यहाँ दो तरह के खतरों की बात कर रहे हैं—एक बाहर से और एक अंदर से। पहली पंक्ति में कहते हैं कि महबूब के तीर बिना धनुष के निकले थे, मतलब उनके शब्द बे-तरतीब और खतरनाक थे। लेकिन दूसरी पंक्ति में शायर अपनी बात घुमाते हैं। वह कहते हैं कि महबूब की बातें तो खतरनाक थीं, लेकिन मेरी ज़िंदगी का सफर... वो तो एक इम्तिहान था, जिसे मैंने खुद पार किया!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.