मुनइ'म के पास क़ाक़ुम ओ संजाब था तो क्या — मीर तक़ी मीर
मुनइ'म के पास क़ाक़ुम ओ संजाब था तो क्या
उस रिंद की भी रात गुज़र गई जो ऊर था
“The night passed even for that Sufi who was the essence.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मुनइम के पास काक़ुम और संजाब था तो क्या, उस रईस की भी रात गुज़र गई जो ऊर था।
विस्तार
यह शेर हमें दुनिया की नश्वरता का एहसास दिलाता है। शायर कहते हैं कि अगर किसी के पास दौलत और शोहरत हो भी, तो क्या फ़र्क पड़ता है? समय का चक्र तो चलता ही रहता है। यहाँ तक कि जो व्यक्ति अपनी हालत में खोया हुआ, एक दीवाने की तरह भटक रहा हो, उसकी रात भी गुज़र जाती है। समय सबसे बड़ा सत्य है।
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