उस फ़स्ल में कि गुल का गरेबाँ भी है हवा — मीर तक़ी मीर
“In that season, where even the gul-flower's waist is in the breeze, He was so intoxicated that even the beloved was unaware.”
अर्थ
वह ऋतु जिसमें हवा गुल के कमरबंध (कमर) को भी झूला रही है, वह दीवाना इतना मदहोश था कि प्रियतम को भी इसका भान नहीं रहा।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की नज़्म में प्रेम और होश के एक गहरे विरोधाभास को बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब माहौल इतना मदहोश करने वाला हो, तो जो व्यक्ति दीवाना हो जाता है, वह भी सबसे ज़्यादा खुद को जानता है। इसका मतलब है कि सच्चा जुनून या प्यार कभी भी बेबुनियाद नहीं होता; बल्कि वह एक ऐसी गहरी समझ होती है, जो हमें अपने अस्तित्व का एहसास कराती है।
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