आतिश बुलंद दिल की न थी वर्ना ऐ कलीम — मीर तक़ी मीर

आतिश बुलंद दिल की न थी वर्ना ऐ कलीम यक शो'ला बर्क़-ए-ख़िर्मन-ए-सद-कोह-ए-तूर था

“My heart was not so fiery that it would have been, O Kaleem, Otherwise, it would have been a flash of lightning, like the mountain of Tur.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

मेरा दिल इतना तेज़ नहीं था कि वह होता, ऐ कलीम, वरना वह बिजली की चमक जैसा होता, जो सद-कोह-ए-तूर पर्वत के समान होती।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब इस शेर में भावनाओं की अचानक और जबरदस्त लहर को बयान कर रहे हैं। शायर कहते हैं कि उनके दिल में कोई धीमा, जलता हुआ जुनून (आतिश) नहीं था। बल्कि, यह जो शोला है, यह तो बिजली की तरह अचानक आया है, जैसे कोई तेज़ कड़कड़ाहट! यह उस पल को दर्शाता है जब एहसास अचानक और बहुत तेज़ी से दिल पर छा जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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