हंगामा गर्म-कुन जो दिल-ए-ना-सुबूर था — मीर तक़ी मीर

हंगामा गर्म-कुन जो दिल-ए-ना-सुबूर था पैदा हर एक नाले से शोर-ए-नुशूर था

“The heart, restless and burning with fervor, Generated noise from every flowing stream's blur.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

हंगामा गर्म-कुन जो दिल-ए-ना-सुबूर था, ऐसा था कि हर नाले से शोर-ए-नुशूर पैदा हो रहा था।

विस्तार

यह शेर दिल के अंदर के उथल-पुथल को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर ने यहाँ एक बेचैन दिल की तस्वीर खींची है। दिल सिर्फ परेशान नहीं है, बल्कि वह एक उबलता हुआ बर्तन है, जिसमें बेचैनी भरी है। यह कहना है कि रूह के हर नस-नस से, हर छोटी-बड़ी नाली से, भावनाओं का शोर लगातार निकल रहा है। यह इश्क़ की गहराई को दिखाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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