था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था — मीर तक़ी मीर
“By the splendor of her beauty, the light she possessed, Even the sun held within it her mere trace's behest.”
अर्थ
उसकी सुंदरता के तेज से, जिस नूर में वह थी, सूरज में भी बस उसका ही एक कण झलक रहा था।
विस्तार
यह शेर उस हसीन नूर की बात करता है, जो इतना कमाल का था कि उसने प्रकृति के सबसे बड़े प्रकाश स्रोत, यानी सूरज को भी प्रभावित कर दिया। शायर कह रहे हैं कि महबूब का हुस्न और नूर इतना मुस्तार था.... कि सूरज की रौशनी में भी सिर्फ़ उसका एक छोटा सा कण दिखाई देता था। यह किसी ऐसी खूबसूरती की तारीफ है, जो नज़रों से परे, रूह को छू जाए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
