कहने लगा कि देख के चल राह बे-ख़बर — मीर तक़ी मीर

कहने लगा कि देख के चल राह बे-ख़बर मैं भी कभू किसू का सर-ए-पुर-ग़ुरूर था

“He started saying, 'When I saw you, I walked the unknown path; I too was once filled with the pride of my head.'”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

वह कहने लगा कि जब उसने देखा, तो वह अनजानी राह पर चला गया; मैं भी कभी किसी के सिर पर घमंड का गर्व था।

विस्तार

यह शेर हमें विनम्रता और आत्म-जागरूकता का पाठ पढ़ाता है। शायर कह रहे हैं कि कोई देख रहा है कि हम एक अनजानी राह पर चल रहे हैं। लेकिन वह इसे एक सीख के रूप में पेश करते हैं—कि उन्होंने भी कभी घमंड किया था। यह जीवन का वह सच है जब अहंकार टूट जाता है और हमें सिर्फ़ खुद की पहचान बचती है।

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