जी जा न आह ज़ालिम तेरा ही तो है सब कुछ — मीर तक़ी मीर
“O, leave me, O cruel one, for everything is yours; From what mouth can we say, 'Indeed, we are surrendered to you.'”
अर्थ
हे जा न आह ज़ालिम, तेरा ही तो है सब कुछ; किस मुँह से फिर कहें, जी क़ुर्बान है हमारा।
विस्तार
यह शेर पूर्ण समर्पण और विवश प्रेम की बात करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि जा, ऐ ज़ालिम, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा ही है। और दूसरा मिसरा पूछता है: हम किस मुँह से कहेंगे कि हम क़ुर्बान हैं? यह उस गहरे, दर्द भरे विरोधाभास को बयां करता है, जहाँ प्रेम इतना सम्पूर्ण होता है कि आप अपना सब कुछ सौंप देते हैं, भले ही इसका मतलब बिछड़ना हो।
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