करता है काम वो दिल जो अक़्ल में न आवे — मीर तक़ी मीर

करता है काम वो दिल जो अक़्ल में न आवे घर का मुशीर कितना नादान है हमारा

“The heart desires what the intellect cannot grasp, Our family's advisor is truly naive and weak.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

वो दिल करता है काम जो अक़्ल में न आवे, घर का मुशीर कितना नादान है हमारा।

विस्तार

Jab Mir Taqi Mir कहते हैं कि दिल वह काम करता है जो अक़्ल में नहीं आ सकता, तो वह भावना की शक्ति समझा रहे हैं। शायर का मानना है कि तर्क और बुद्धि की सीमाएँ हैं, लेकिन दिल के एहसास कहीं भी बंधे नहीं होते। वह इस बात पर इशारा करते हैं कि बाहरी सलाह या तार्किक राय (जैसे घर का मुशीर) अक्सर दिल की सच्चाई को नहीं समझ पाती। यह नज़ाकत बताती है कि जीवन में सबसे बड़ा मार्गदर्शक हमारा अपना अंतर्मन होता है।

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