क्या ख़ानदाँ का अपने तुझ से कहें तक़द्दुस — मीर तक़ी मीर
“What lineage can claim from you, O sacred one, even to speak, 'This is yours?' Our soul is merely an insignificant gatekeeper.”
अर्थ
क्या किसी खानदान को यह दावा करने का अधिकार है कि वह आप से, ऐ पवित्र आत्मा, कुछ भी कहे? हमारी आत्मा तो बस एक मामूली सा रक्षक है।
विस्तार
यह शेर हमें बताती है कि दुनियावी रुतबा और वंश (खानदाँ) कितना भी बड़ा क्यों न हो, वो रूह की पवित्रता के सामने कुछ भी नहीं है। शायर Mir Taqi Mir यहाँ एक बहुत गहरा आध्यात्मिक संदेश दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आपके पास रूह-ए-क़ुदूस का साया है, यानी आत्मा में कोई दिव्यता है, तो किसी भी खानदाँ का ज़िक्र करना बेमानी है। यह है रूह की इबादत!
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