जब ले नक़ाब मुँह पर तब दीद कर कि क्या क्या — मीर तक़ी मीर

जब ले नक़ाब मुँह पर तब दीद कर कि क्या क्या दर-पर्दा शोख़ियाँ हैं फिर बे-हिजाबियाँ हैं

“When you draw the veil over your face, then look and see what wonders there are; what coquettishness and what unbound natures are.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

जब तुम अपने चेहरे पर नक़ाब लपेटती हो, तब देखना कि क्या-क्या अद्भुत चीज़ें हैं; किस तरह की नज़ाकत और किस तरह की आज़ाद अदाएँ हैं।

विस्तार

यह शेर खूबसूरती और रहस्य के अद्भुत मेल को बयां करता है। शायर कहते हैं कि किसी की अदा में दो तरह की कशिश होती है—एक है पर्दे के पीछे की नजाकत, जो रहस्यमय होती है, और दूसरी है जो पूरी तरह से खुल के सामने आती है। मिर्ज़ा तक़ी मीर ने बड़ी ही नज़ाकत से इन दोनों तरह की ख़ूबसूरती को सामने रखा है, जो मन को मोह लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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