इस सर-ए-ज़ुल्फ़ का ख़याल न छोड़ साँप के सर ही याँ कुचलते हैं

“Do not let go of the thought of this mane of tresses, For the serpent crushes only the heads.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

इस ज़ुल्फ़ के सौंदर्य का ख़याल मत छोड़, क्योंकि साँप केवल सिर ही कुचलते हैं।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहराइयों को छूता है। 'सर-ए-ज़ुल्फ़' किसी महबूब की खूबसूरती, किसी नाज़ुक एहसास का प्रतीक है। लेकिन दूसरी लाइन में क्या है? 'साँप के सर ही याँ कुचलते हैं'—इसका मतलब है कि जीवन में इतने बड़े, इतने खतरनाक संघर्ष चल रहे हैं। शायर कहते हैं कि जब ज़िन्दगी सिर्फ़ जंग लड़ रही हो, तो किसी भी नज़ाकत या ख़याल को याद रखना... यह कितना मुश्किल है! यह शेर संघर्ष और इश्क़ के बीच का टकराव दिखाता है।

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