कम-फ़ुर्सती जहाँ के मजमे' की कुछ न पूछो
अहवाल क्या कहूँ मैं इस मजलिस-ए-रवाँ का
“Do not ask about the gatherings of those with little time, How can I describe the condition of this flowing assembly?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कम-फ़ुर्सती वाले जहाँ के मजमे क्या पूछो, मैं इस बहती हुई महफ़िल का हाल क्या कहूँ।
विस्तार
यह शेर महफ़िल के माहौल पर एक बहुत गहरा तंज़ और इज़हार है। शायर जी यहाँ दो तरह के मजमे की बात कर रहे हैं—एक तो वो जहाँ लोग यूँ ही समय काटने के लिए इकट्ठा होते हैं, और दूसरा... ये जो महफ़िल है। उनका कहना है कि इस मजलिस का हाल क्या बताऊँ! यह तो भावनाओं का एक ऐसा सैलाब है, जिसे लफ़्ज़ों में बयान करना नामुमकिन है।
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