फ़ितराक जिस का अक्सर लोहू में तर रहे है — मीर तक़ी मीर
फ़ितराक जिस का अक्सर लोहू में तर रहे है
वो क़स्द कब करे है इस सैद-ए-नातवाँ का
“Whose blood is often dripping with innate longing, When will he make a deliberate effort, this master of eulogy?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जिसका रक्त अक्सर सहज रूप से बह रहा है, वह इस नज़्म के बादशाह का कोई जानबूझकर इरादा कब करेगा।
विस्तार
यह शेर उस आत्मा की गहरी भावनात्मक थकावट को बयान करता है जो हर वक़्त किसी न किसी बलिदान या धोखे के घाव से लहू में सनी रहती है। शायर कहते हैं कि जो इंसान बार-बार तकलीफ झेले, उसके पास किसी और के लिए कोई सच्ची चाहत या इरादा करना संभव नहीं होता। यह वफ़ा और दर्द का एक बहुत ही गहरा तफ़कर है।
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