दी आग रंग-ए-गुल ने वाँ ऐ सबा चमन को — मीर तक़ी मीर

दी आग रंग-ए-गुल ने वाँ ऐ सबा चमन को याँ हम जले क़फ़स में सुन हाल आशियाँ का

“O spring breeze, the color of roses, you have stained the garden; / Look at the condition of the nest, here we are burning.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ऐ सबा, गुल के रंग से तूने चमन को रंग दिया; यहाँ हम क़फ़स में जल रहे हैं, आशियाँ का हाल सुन।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब ने बहुत ही दर्द भरे अंदाज़ में लिखा है। शायर कह रहे हैं कि मोहब्बत की आग, गुलाब के रंग की आग... इसने पूरे चमन को जला दिया। लेकिन क्या आपने ध्यान दिया? बाहर का सब कुछ जल रहा है, पर हम... हम तो क़ैद में हैं। यह क़ैद एक शारीरिक क़ैद नहीं है, बल्कि दिल की तक़दीर की क़ैद है। शायर हमें अपने अंदर के हाल को सुनने को कह रहे हैं!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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