या रोए या रुलाया अपनी तो यूँ ही गुज़री — मीर तक़ी मीर
“Whether I cried or whether I was made to cry, my life passed by just so, what mention is there of my companions, the friends of the joyful?”
अर्थ
चाहे मैंने रोया हो या मुझे रुलाया गया हो, मेरा समय बस यूँ ही बीत गया; मेरे सखाओं और खुशहाल मित्रों का क्या ज़िक्र है।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर की गहरी भावनाओं को बयां करता है। शायर कहते हैं कि चाहे रोना हो या रुलाना, ये सब एहसास बस गुज़र जाते हैं। असली गम तो उस खुशी के साथ गुज़रे हुए लम्हों का है—यारों और महफ़िल की रौनक का। यह एक तरह से उस खोई हुई सामूहिक खुशी पर विलाप है, जो किसी एक आँसू से कहीं ज़्यादा बड़ी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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