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सौदाई हो तो रक्खे बाज़ार-ए-इश्क़ में पा सर मुफ़्त बेचते हैं ये कुछ चलन है वाँ का

If you are saddened, keep it in the marketplace of love; It is the custom of that place to sell some things for free.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यदि आपको दुःख है, तो उसे प्रेम के बाज़ार में रख दें; वहाँ का चलन है कि कुछ चीज़ें मुफ्त में बिकती हैं।

विस्तार

यह शेर इश्क़ के बाज़ार की हकीकत बयां करता है। शायर कहते हैं कि जब इंसान बेबस हो जाता है, जब वो आशिक़ की तड़प में होता है, तो वो अपनी इज़्ज़त, अपना सर... सब कुछ मुफ्त में बेच देता है। ये कोई गुनाह नहीं, बल्कि उस जगह का चलन है, जहाँ इश्क़ की आग में इंसान सब कुछ कुर्बान कर देता है। यह दर्द और तड़प का आलम है।

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