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जिस दिन कि उस के मुँह से बुर्क़ा उठेगा सुनियो उस रोज़ से जहाँ में ख़ुर्शीद फिर झाँका

On the day the veil will lift from her lips, listen well, From that day, the sun will never shine upon the world.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

जिस दिन उसके मुँह से बुर्का उठेगा, उस दिन के बाद से दुनिया में सूरज कभी नहीं चमकेगा।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ मुहब्बत की बात नहीं करता, यह वक़्त के एक बड़े मोड़ की बात करता है। शायर कहते हैं कि जब महबूबा के मुँह से वो अल्फ़ाज़ निकलेंगे, तो ये दुनिया का नज़ारा हमेशा के लिए बदल जाएगा। 'ख़ुर्शीद' का न झाँकना, मतलब दुनिया में रोशनी का कोई ठिकाना नहीं रहेगा। यह एक ऐसा इश्क़ है, जिसके बोल ही क़िस्मत बदल देते हैं।

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