हैं दश्त अब ये जीते बस्ते थे शहर सारे — मीर तक़ी मीर

हैं दश्त अब ये जीते बस्ते थे शहर सारे वीरान-ए-कुहन है मामूरा इस जहाँ का

“Now these deserts are the places where the whole city once lived, The world is a ruin, O lord of this world.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अब ये बंजर रेगिस्तान वे स्थान हैं जहाँ कभी पूरा शहर बसता था, यह संसार एक खंडहर है, ऐ इस जहाँ के मालिक।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरा और विचारोत्तेजक है। शायर साहब कहते हैं कि कभी जो रौनक, जो ज़िंदगी बड़े शहरों में बसती थी, वो अब कहीं और चली गई है। अब तो यह दश्त (रेगिस्तान) ज़्यादा ज़िंदा लगता है। मानो पूरा जहाँ ही किसी पुराने, वीरान दौर के खंडहर जैसा हो गया है। यह वक़्त के बदलाव का दर्द है।

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