रात का पहना हार जो अब तक दिन को उतारा उन ने नहीं शायद 'मीर' जमाल-ए-गुल भी उस के गले का हार है आज

“The garland of the night, which they removed from the day, is not a thing Perhaps even 'Mir,' the garland of Jamal-e-Gul, is today.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

रात का पहना हार जो अब तक दिन को उतारा उन ने नहीं, शायद 'मीर' जमाल-ए-गुल भी उस के गले का हार है आज। (अर्थ: यह पंक्तियाँ कहती हैं कि रात ने वह हार नहीं उतारा जो दिन ने पहना था; शायद 'मीर' जमाल-ए-गुल भी आज उसके गले का हार है।)

विस्तार

यह शेर बहुत गहरा है! शायर यहां सुंदरता को एक ऐसे हार से तुलना कर रहे हैं जो कभी उतरता ही नहीं। इसका मतलब है कि महबूब की खूबसूरती महज़ कोई श्रृंगार नहीं है, बल्कि वो तो उनके अस्तित्व का एक स्थायी हिस्सा है। जैसे हार गले से चिपका रहता है, वैसे ही यह सुंदरता भी हमेशा साथ रहती है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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