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जज़्ब-ए-इश्क़ जिधर चाहे ले जाए है महमिल लैला का
यानी हाथ में मजनूँ के नाक़े की उस के महार है आज

The passion of love takes whomever it wills, like the journey of Leila; Today, the hand of Majnun's desire is at the threshold of that mystery.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

प्रेम का जुनून जहाँ चाहे वहाँ ले जाता है, जैसे लैला का महल। आज मजनूँ की चाहत का हाथ उस रहस्य के द्वार पर है।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब इस शेर में इश्क़ की उस रूहानी ताक़त का ज़िक्र करते हैं, जो आपको किसी भी मंज़िल पर ले जा सकती है। वो कहते हैं कि इश्क़ की ललक आपको लैला के खूबसूरत लेकिन ख़तरनाक बाग़ तक ले जाएगी.... और सिर्फ़ इतना ही नहीं! शायर कहते हैं कि आज आपके हाथ में मजनूँ के तीरों जैसी निपुणता है। यह सिर्फ़ एक एहसास नहीं, बल्कि एक ज़बरदस्त तैयारी है!

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