शौक़ से बात बढ़ गई थी बहुत — मीर तक़ी मीर
शौक़ से बात बढ़ गई थी बहुत
दफ़्तर उस को लिखें हैं क्या है ख़त
“The conversation had grown too much with desire, What kind of letter should I write to that office?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
शौक़ से बात बहुत बढ़ गई थी, अब दफ़्तर में उसे क्या लिखना है ख़त।
विस्तार
यह शेर उस उलझन को बयां करता है जब दिल और दिमाग़ एक-दूसरे से टकराते हैं। शायर कह रहे हैं कि बात इतनी बढ़ गई कि अब कोई और फ़ैसला लेना मुश्किल है। जब भावनाएँ इतनी गहरी हो जाएँ, तो रोज़मर्रा के काम—जैसे दफ़्तर में ख़त लिखना—भी एक चुनौती बन जाते हैं। यह उस मीठी सी बेचैनी का एहसास है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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