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नाला-कश हैं अहद-ए-पीरी में भी तेरे दर पे हम क़द्द-ए-ख़म-गश्ता हमारा हल्क़ा है ज़ंजीर का

In your sacred grace, even in the path of piety, we are like a necklace, at your door, whose body is a circle of chains.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

तेरे दर पर हम ऐसे हैं, जैसे नला-कश हैं तेरी पवित्रता के वादे में भी; हमारा शरीर तो एक हार है, जो ज़ंजीरों के घेरे में बंधा है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ और इबादत के बीच के विरोधाभास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि वे इतने भावुक हैं कि महबूब के दर पर भी, जहाँ पीरी का वादा मिला है, आँसू नहीं रुकते। उनका कहना है कि उनका वजूद, उनकी हैसियत, सिर्फ़ ज़ंजीरों का एक घेरा है। यह बताता है कि इश्क़ का बंधन कितना मज़बूत और बेबस होता है।

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