बू-ए-ख़ूँ से जी रुका जाता है ऐ बाद-ए-बहार
हो गया है चाक दिल शायद कसो दिल-गीर का
“The breath is held by the scent of blood, oh spring breeze, Perhaps the heart has become a trap for the heart-breaker.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बू-ए-ख़ूँ की महक से साँसें थम जाती हैं, ऐ बहार की हवा। शायद दिल ही दिल-लगाने वाले का एक जाल बन गया है।
विस्तार
यह शेर आशिक़ के दिल की नाज़ुक और खतरनाक हालत को बयान करता है। शायर कहते हैं कि सिर्फ़ ख़ून की महक... बस इतनी सी महक ही साँसें रोक सकती है, ऐ बहार! और फिर कहते हैं कि मेरा दिल तो किसी दिल-गीर का जाल बन गया है। यह एहसास है कि प्यार में इंसान कितना बेबस हो जाता है, जहाँ दर्द भी एक तरह का नशा लगता है।
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