कहीं क्या बाल तेरे खुल गए थे — मीर तक़ी मीर
“Where did your locks of hair unravel, my beloved, That a mere gust of wind was enough to touch them.”
अर्थ
कहीं क्या बाल तेरे खुल गए थे, कि झोंका बाव का कुछ मुश्कबू था। (अर्थ: तेरे बाल इतने खुल गए कि एक मामूली हवा का झोंका भी उन्हें छूने के लिए काफी था।)
विस्तार
देखिए, शायर जी यहाँ महबूब की सादगी में छिपी जादुई खूबसूरती का वर्णन कर रहे हैं। उनके बाल बस खुल गए थे, और उस हवा में जो महक आई, वो इतनी मदहोश कर देने वाली थी कि शायर जी को लगा जैसे ये खुशबू महबूब के ही होने से आ रही है। यह एक ऐसा नज़ारा है जो आँखों को नहीं, बल्कि रूह को छू जाता है।
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