सहर-ए-गह-ए-ईद में दौर-ए-सुबू था — मीर तक़ी मीर

सहर-ए-गह-ए-ईद में दौर-ए-सुबू था पर अपने जाम में तुझ बिन लहू था

“In the morning light of the Eid field, the era of joy was present, But in my cup, without you, there was only blood.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

ईद के मैदान की सुबह में खुशियों का दौर था, पर अपने जाम में तुझ बिन सिर्फ़ खून था।

विस्तार

मिर्ज़ा तक़ी मीर ने बाहरी जश्न और अंदरूनी दर्द का कितना गहरा नज़ारा पेश किया है! ये शेर ईद की सुबह की बात करता है, जब हर जगह खुशबू और रौनक होती है। लेकिन शायर कहते हैं कि उनके जाम में तो सिर्फ़ 'तुझ बिन लहू' है। यह लहू महज़ खून नहीं, बल्कि विरह का वो कड़वा एहसास है, जो किसी भी जश्न को बेमानी बना देता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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