न उठ तो घर से अगर चाहता है हूँ मशहूर — मीर तक़ी मीर

न उठ तो घर से अगर चाहता है हूँ मशहूर नगीं जो बैठा है गड़ कर तो कैसा नामी है

“If you do not wake up from your home, yet you wish to be famous,”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

अगर तुम घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, लेकिन फिर भी मशहूर होना चाहते हो, तो यह कैसा नाम है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि दुनिया में इज़्ज़त और पहचान का क्या मतलब है। शायर कहते हैं कि अगर कोई इंसान पहले से ही मशहूर है, तो उसे कहीं बाहर होने की ज़रूरत नहीं। लेकिन अगर वह व्यक्ति बस कोने में, या घर में छिपकर बैठा रहे.... तो उसकी 'नामी' (पहचान) क्या होगी? यह शेर हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या सिर्फ़ नाम होना काफी है, या वजूद में भी कुछ होना ज़रूरी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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