रही न पुख़्तगी आलम में दूर ख़ामी है — मीर तक़ी मीर
“In the world, the completeness is nowhere to be found, / But the wheel of agreement among thousands of villains spins on.”
अर्थ
इस संसार में पूर्णता कहीं नहीं है, लेकिन हज़ारों कमीनों की सहमति का चक्र घूम रहा है।
विस्तार
यह शेर इंसान और दुनिया की हकीकत पर एक गहरा तंज़ है। शायर कहते हैं कि यह आलम में कोई पूर्णता नहीं है, सब कुछ अधूरा है। और सबसे बड़ी बात तो ये है कि जिस 'चक्र' पर ये दुनिया चल रही है—ये सहारा, ये सहमति—ये सब हज़ारों ऐसे कमज़ोर, कमियों वाले लोगों की नींव पर टिका है। यह एक बहुत ही कड़वा सच है, जो इंसान की कमज़ोरी को सामने लाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
