कहाँ से तह करें पैदा ये नाज़िमान-ए-हाल कि पोच-बाफ़ी ही है काम इन जुलाहों का

“From where should I weave this poem of my condition, When the weavers of these threads are only skilled in patching?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं अपनी इस हालत का नज़्म कहाँ से बुनूँ, जब इन धागों के बुनकरों का काम सिर्फ़ पैचवर्क करना है।

विस्तार

यह शेर बताता है कि हमारी भावनाएं कितनी जटिल होती हैं। शायर पूछ रहे हैं कि इस दिल की हालत को कोई कैसे समझाए? क्योंकि ये ज़िन्दगी, ये एहसास... ये तो किसी कारीगर ने अलग-अलग टुकड़ों को जोड़कर बनाया है। इसे 'पोच-बाफ़ी' कहते हैं—यानी, यह कोई साफ़-सुथरी कहानी नहीं है, यह तो अनुभवों का एक मिला-जुला, खूबसूरत नज़ारा है।

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