तिश्ना-ए-ख़ूँ है अपना कितना 'मीर' भी नादाँ तल्ख़ी-कश दम-दार आब-ए-तेग़ को उस के आब-ए-गवारा जाने है

“My own thirst for blood is such that even you, O Mir, are naive and bitter-flavored. How can he, whose water is the essence of the sword, know the water of ease?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

मेरा अपना खून का प्यासा होना ऐसा है कि आप, ऐ मीर, भी नादान और कड़वे ज़ायके वाले हैं। वह व्यक्ति, जिसका पानी तलवार का सार है, वह आसानी के पानी को कैसे जान सकता है।

विस्तार

यह शेर जीवन के एक कड़वे सच को बयां करता है। मीर तक़ी मीर कहते हैं कि मेरी प्यास तो मेरे अपने ख़ून के लिए है—यानी मेरा दर्द गहरा है। शायर कहते हैं कि जिस शख़्स ने सिर्फ़ ज़हर (दर्द) का पानी पिया है, वह कभी मीठे पानी (खुशी) की क़ीमत नहीं जान पाएगा। यह अनुभव की गहराई और दर्द से उपजी समझ का बेहतरीन नज़ारा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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