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अब गरेबाँ कहाँ कि नासेह चढ़ गया हाथ उस दिवाने के

Now where can I go, O intoxicated one, When the hand of that mad lover has taken hold.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

हे नासेह, अब मैं कहाँ जाऊँ, जब उस दीवाना के हाथ में मेरा हाथ आ गया है।

विस्तार

यह शेर उस हालत को बयां करता है जब इश्क़ इतना गहरा हो जाता है कि इंसान अपनी सारी सुरक्षा, अपनी सारी हदें भूल जाता है। शायर कहते हैं कि अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है.... क्योंकि पागल दीवानगी का हाथ तो क़ैदी बनकर दिल पर पड़ चुका है। यह इश्क़ की बेबस, लेकिन हसीन तबाही है।

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