बस हैं दो बर्ग-ए-गुल क़फ़स में सबा
नहीं भूके हम आब-ओ-दाने के
“Only two petals of flower are in the cage, O Spring; we are not hungry for water or grain.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बस दो पंखुड़ियाँ (बर्ग-ए-गुल) पिंजरे (क़फ़स) में हैं, ऐ बहार (सबा); हम पानी या अन्न (आब-ओ-दाने) के भूखे नहीं हैं।
विस्तार
यह शेर संतोष और आत्म-निर्भरता की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि बस गुलाब के क़ैद में दो पत्तियाँ और एक बहार की महक ही काफी है। हमें दुनिया की दौलत या भौतिक चीज़ों से जीने की ज़रूरत नहीं। यह एक गहरा एहसास है कि जीवन की असली ख़ुशी और संतुष्टि तो छोटी-छोटी, खूबसूरत चीज़ों में ही छिपी होती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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