दम-ए-आख़िर ही क्या न आना था और भी वक़्त थे बहाने के

“Why did the breath of the end have to come now? There were other times for excuses.”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

आखिरी साँस का आना ही क्या था, जब बहाने बनाने के और भी वक़्त थे।

विस्तार

यह शेर वक़्त की सज़ा और तन्हाई का दर्द बयां करता है। शायर पूछते हैं कि आखिर में, जब सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब आप क्यों नहीं आए? ऐसा लगता है जैसे मंज़िल पर पहुँचने से पहले ही रास्ते में बहुत से बहाने और वक़्त गुज़र गए। यह उस बेचैनी को दिखाता है जब किसी का इंतज़ार करना, और फिर उस वक़्त को समझना कि वह कभी नहीं आएगा, एक बहुत गहरा ज़ख्म होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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