रंज-ओ-मेहनत से बाज़ क्यूँके रहूँ वक़्त जाता रहे तो हसरत है

“Why should I live with sorrow and toil, When time keeps passing and my heart yearns?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

रंज-ओ-मेहनत से बाज़ क्यूँके रहूँ, वक़्त जाता रहे तो हसरत है। इसका अर्थ है कि जब समय बीत रहा है और दिल में तड़प है, तो मैं दुख और मेहनत से दूर क्यों रहूँ।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के एक बहुत गहरे फ़लसफ़े को समझाता है। शायर पूछते हैं कि हमें रंज-ओ-मेहनत, यानी गम और संघर्ष की चिंता क्यों करनी चाहिए? उनका कहना है कि समय जब गुज़रता जाता है, तो बस एक चीज़ बाकी रहती है—वह है हसरत। यह अहसास कि जो चीज़ हमें चाहिए, वो मिल नहीं रही, यही सबसे बड़ा दर्द है। यह एहसास हमें सिखाता है कि ज़िंदगी का असली संघर्ष तो वक़्त के गुज़रने में छिपा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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