क्या है फिर कोई दम को क्या जानो
दम ग़नीमत मियाँ जो फ़ुर्सत है
“What power is there, what do I know? It is a great favor, friend, that I have leisure time.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
क्या है फिर कोई दम, को क्या जानूँ। दम ग़नीमत मियाँ, जो फ़ुर्सत है।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के गहरे फ़लसफ़े को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि ज़िंदगी में कोई ऐसा रहस्य नहीं है जिसे जानना ज़रूरी हो.... हम बस एक पल की ज़िंदगी के अहसास पर जी रहे हैं। यह एक तरह की तसल्ली है कि जीवन तो बस एक ग़नीमत है, एक फ़ुर्सत है। यह शेर हमें सिखाता है कि ज़िंदगी की उलझनों में ज़्यादा न सोचें, बस इस पल को जी लें और इस साँस के एहसास पर शुक़र करें।
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