एक ही चश्मक थी फ़ुर्सत सोहबत-ए-अहबाब की — मीर तक़ी मीर

एक ही चश्मक थी फ़ुर्सत सोहबत-ए-अहबाब की दीदा-ए-तर साथ ले मज्लिस से पैमाना गया

“There was only one pair of eyes for the company of loved ones, But the pair of eyes of the beloved left the gathering.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

शायर कहता है कि केवल प्रियजनों की संगत के लिए एक ही जोड़ी आँखें थीं, लेकिन प्रिय के नेत्रों के साथ वह समागम से चली गईं।

विस्तार

देखिए, यह शेर बहुत ही गहरे अहसास को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि ज़िंदगी का सारा सुकून, सारा फ़र्ज़त.... बस अपने दोस्तों और महफ़िल की संगत में था। लेकिन जब वो लोग चले गए, तो मानो हमारे जीवन का 'पैमाना' ही बदल गया। जिस नज़र से हम दुनिया देखते थे, वो भी उस महफ़िल के साथ ही चली गई। यह बिछड़ने के दर्द को बहुत खूबसूरती से बयान करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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