कुछ न देखा फिर ब-जुज़ यक शोला-ए-पुर-पेच-ओ-ताब
शम्अ' तक तो हम ने देखा था कि परवाना गया
“We saw nothing more, save for a flame of complexity and brilliance, For even the candle flame, we had witnessed the moth's departure.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
फिर हमने जटिलता और चमक की एक लौ के अलावा कुछ नहीं देखा, क्योंकि हमने तो मोमबत्ती की लौ में भी पतंगे के चले जाने का दृश्य देख लिया था।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही गहरे आकर्षण और एक ही जगह टिके रहने की बात करता है। शायर ने यहाँ मोमबत्ती और परवाने का बिंब इस्तेमाल किया है। वो कह रहे हैं कि उन्होंने परवाने को लौ की तरफ जाते देखा, लेकिन उसके बाद उन्हें केवल एक ही, जटिल और चमकदार लौ दिखाई देती है। यह उस जुनून भरे इश्क़ की निशानी है, जो अपनी निगाहें बस एक ही चीज़ पर टिका देता है, बाकी सब कुछ नज़रअंदाज़ कर देता है।
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